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ज्ञान गंगा

16 Dec

Bole Teri Boli

“दो शब्द”<br> “बाबा तो ब्रह्म रुप है, वे नहिं देखें दोय,<br> जैसी जाकि भावना, तैसो ही फल होय”<br> छः चीजें अनादि हैं जिनका जन्म नहीं होता, ब्रह्म, माया, ईश्वर, जीव, इनका आपस में संबन्ध और इनका भेद । ब्रह्म अनादि अनन्त है

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13 Apr

Vichaar Geeta

प्रस्तावना<br> सन्तों का इस धराधाम पर आगमन लोक कल्याण के लिए होता है। उनकी प्रत्येक क्रिया का लक्ष्य सर्वजन हिताय-सर्वजन सुखाय होता है। “जीवन का परम लक्ष्य -परमानन्द की प्राप्ति तथा दुःखों की आत्यंतिक निवृत्ति तथा इस के ज्ञान का प्रसार

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12 Apr

Tatvamasi

सम्पादक की ओर से<br> सन्तों का इस धराधाम पर आगमन लोक कल्याण के लिए होता है। उनकी प्रत्येक क्रिया का लक्ष्य सर्वजन हिताय-सर्वजन सुखाय होता है। जीवन का परम लक्ष्य – ‘परमानन्द की प्राप्ति तथा दुःखों की अत्यांतिक निवृत्ति तथा इस के ज्ञान का प्रसार

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